बोल पर नियंत्रण
• अक्सर हमारे बोल बने बनाये खेल बिगाड़ देते हैं | एक बार द्रौपदी अपने महल में झरोके में खड़ी थीं | भाग्यवश दुर्योधन वहां से गुज़रा और बिना देखे पानी के सरोवर में गिर गया | इस पर द्रौपदी ने कहा “अंधे का पुत्र अँधा”| अगर उस समय द्रौपदी अपने वचनों पर थोडा नियंत्रण रखती तो शायद ये युद्ध कभी नहीं होता | इसके इलावा शिशुपाल के वचन और शकुनी की बातें भी काफी कठोर थी | इसलिए कहा जाता है की वाणी को सदेव मधुर रखना चाहिए |