ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की

ग़म-ए-दुनिया से गर पाई भी फ़ुर्सत सर उठाने की
फ़लक का देखना तक़रीब तेरे याद आने की