Bookstruck
← Back
☰ Chapter List
कविता ४
Share:
💬 WhatsApp
✈ Telegram
सावन कि बरसातें हैं, कुछ रात भी ज़्यादा कारी है,
तुम बिन कैसे कहें रहते हैं, कैसे शाम गुज़ारी है |
← Back
☰ Chapter List