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वक्त के साथ तू चलता चल

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कविता - वक्त के साथ तू चलता चल
लेखक -राम लोहार

तू न डर हरा न मन को,आगे बड़ दे न्योता गगन को
कर साहस खिलेगा कमल,तेरे तप का मिलेगा फल

वक्त के साथ तू चलता चल
वक्त के साथ तू चलता चल

बाधाऐ आएगी घबराना मत ,हार कर पीछे मुड जाना मत
इस अंधेरे जीवन का होगा कल ,तेरी समस्याओ का निकलेगा हल

वक्त के साथ तू चलता चल
वक्त के साथ तू चलता चल

सपना तेरा साकार होगा,साथ तेरे निराकार होगा
उठा सस्त्र बना ले दल,कर्म भूमि पर गाड दे हल

वक्त के साथ तू चलता चल

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