गौतम का इंद्र और अहिल्या को श्राप

बात तब की है जब श्रिष्टि के विकास में रत थे ब्रह्मा, उसी समय उन्होंने अपनी मानस पुत्री अहिल्या की रचना थी जिसको ये वर था की वो ताउम्र सोलह वर्ष की युवती ही रहेगी| ऐसे इंद्र और देवता उसे अपना बनाने केलिए तड़पने लगे, तब ब्रह्मा ने एक स्पर्धा रखी जिसमे गौतम ऋषि जीते और उनका विवाह अहिल्या से हुआ.|लेकिन इंद्र की वासना शांत न हुई वो इस ताक में रहता था की कब अहिल्या को अपना बनाएं , ऐसे में उसे एक दिन मौका मिला| गौतम ऋषि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में मुर्गे की बांग पे उठते नदी में स्नान करते और फिर अपने दैनिक कर्मो में लगते थे|