गंधर्वपुरी
मध्यप्रदेश के देवास जिले के एक गांव गंधर्वपुरी को शापित गांव माना जाता है। यह गांव प्राचीनकाल में राजा गंधर्वसेन के शाप से पूरा पत्थर में बदल गया था। यहां का हर व्यक्ति, पशु और पक्षी सभी शाप के असर से पत्थर के हो गए थे। फिर एक धूलभरी आंधी चली , जिससे यह पूरी नगरी जमीन में दफन हो गई।देवास की सोनकच्छ तहसील में स्थित है एक ऐसा गांव जो भारत के बौद्धकालीन इतिहास का गवाह है। इस गांव का नाम पहले चंपावती था। चंपावती के पुत्र गंधर्वसेन के नाम पर बाद में गंधर्वपुरी हो गया। आज भी इसका नाम गंधर्वपुरी है।लोगों के अनुसार यहां गंधर्वसेन, के शाप से पूरी गंधर्व नगरी पत्थर की हो गई थी। राजा गंधर्वसेन के बारे में कई किस्से प्रचलित हैं, लेकिन इस स्थान से जुड़ी कहानी कुछ अजीब सी ही है। कहते हैं कि गंधर्वसेन ने चार विवाह किए थे। उनकी पत्नियां चारों वर्णों से थीं। क्षत्राणी से उनके तीन पुत्र हुए सेनापति शंख, राजा विक्रमादित्य तथा ऋषि भर्तृहरि।