शून्य का आविष्कार

शू्न्य नहीं होता तो आधुनिक विकास भी नहीं  होता। शून्य से पहले दुनियाभर में कई तरह की अंक प्रणालियां विकसित थीं। उत्तर वैदिक काल (1000 से 500 ईस्वी पूर्व तक) में शून्य के आविष्कार के बाद ही गणित में एक क्रांति आ गई।