कौशल्या
भगवान राम की माता कौशल्या बहुत ही स्नेहशील थीं। अपने पुत्र का वन-गमन उनके लिए सबसे दुखदायी घटना थीं। माता कौशल्या ने अपने पुत्र को इस प्रकार संस्कार दिए कि विमाता कैकेयी के कुभावों से भी राम विचलित नहीं हुए और झट वनवासी होना स्वीकार कर लिया।