शबरी

शबरी को श्रीराम के प्रमुख भक्तों में गिना जाता है। शबरी का वास्तविक नाम 'श्रमणा' था। वह भील समुदाय की 'शबरी' जाति से थीं। शबरी के पिता भीलों के राजा थे। शबरी जब विवाह के योग्य हुई तो उनके पिता ने एक दूसरे भील कुमार से उसका विवाह पक्का कर दिया और धूमधाम से उनके विवाह की तैयारी की जाने लगी। विवाह के दिन सैकड़ों बकरे-भैंसे बलिदान के लिए लाए गए।बकरे-भैंसे देखकर शबरी ने अपने पिता से पूछा- 'ये सब जानवर यहां क्यों लाए गए हैं?' पिता ने कहा- 'तुम्हारे विवाह के उपलक्ष्य में इन सबकी बलि दी जाएगी।'