एक सवाल
<p dir="ltr">कविता का शीर्षक-"एक सवाल"</p>
<p dir="ltr">लेखक- राम लौहार</p>
<p dir="ltr">छोटी सी,नादान और ना समझ थी।<br>
पर जैसी भी थी,तू सबसे अच्छी थी।</p>
<p dir="ltr">बिना कुछ पूछे ही, तू मुझे सबकुछ बता देती थी।<br>
तू तेरी आँखो से ही सब कुछ जता देती थी।</p>
<p dir="ltr">हाईट छोटी थी मेरी,पर तू भी कहाँ लंबी थी।<br>
छोटी -छोटी बातो पर रूठ कर इतराया करती थी।</p>
<p dir="ltr">ना समझ होकर भी, तू मुझे समझ जाती थी।<br>
दूर होकर मुझे भी,तेरी याद आती थी।</p>
<p dir="ltr">तेरी हर नादानियों पर मुझे तरस आता था।<br>
रुक -रुक कर कहूँ क्या,समझ नही आता था।</p>
<p dir="ltr">में तेरे लिए कुछ था या नही पता नही है आज भी मुझे।<br>
पर मेरे हर शब्द में पहले तेरा ही नाम आता था।</p>
<p dir="ltr">छोटी-छोटी बातो पर जंग हुवा करती थी।<br>
तू रूठ कर भी कहाँ ,सच में रूठा करती थी।</p>
<p dir="ltr">फिर हाईट तेरी और कद मेरा बढ़ने लगा।<br>
में तो पास था ,पर दुरी का मतलब समझने लगा।</p>
<p dir="ltr">तेरी नादानियों को अपनी गलतियां समझने लगा।<br>
तू भूल ना जाये सचमुच कहि मुझे ,यही डर लगने लगा।</p>
<p dir="ltr">में यूँ ही नही रूठ जाता तेरी किसी बात पर।<br>
हवा भी पास से गुजरे तेरे तो गुस्सा आता है मुझे अपने आप पर।</p>
<p dir="ltr">पता है मुझे,एक दिन तू चली जायेगी।<br>
पर गम तो उस दिन होगा जब उसके साथ रहकर तू मुझे भुल जायेगी।</p>
<p dir="ltr">क्या तू अपने आप को श्याम के जैसा रख पायेगी?<br>
रही साथ रुक्मणी तो क्या राधा को भूल जायेगी?</p>
<p dir="ltr">क्या राधा को भूल जायेगी?<br>
क्या राधा को भूल जायेगी?<br></p>
<p dir="ltr">Please share it</p>
<p dir="ltr">लेखक- राम लौहार</p>
<p dir="ltr">छोटी सी,नादान और ना समझ थी।<br>
पर जैसी भी थी,तू सबसे अच्छी थी।</p>
<p dir="ltr">बिना कुछ पूछे ही, तू मुझे सबकुछ बता देती थी।<br>
तू तेरी आँखो से ही सब कुछ जता देती थी।</p>
<p dir="ltr">हाईट छोटी थी मेरी,पर तू भी कहाँ लंबी थी।<br>
छोटी -छोटी बातो पर रूठ कर इतराया करती थी।</p>
<p dir="ltr">ना समझ होकर भी, तू मुझे समझ जाती थी।<br>
दूर होकर मुझे भी,तेरी याद आती थी।</p>
<p dir="ltr">तेरी हर नादानियों पर मुझे तरस आता था।<br>
रुक -रुक कर कहूँ क्या,समझ नही आता था।</p>
<p dir="ltr">में तेरे लिए कुछ था या नही पता नही है आज भी मुझे।<br>
पर मेरे हर शब्द में पहले तेरा ही नाम आता था।</p>
<p dir="ltr">छोटी-छोटी बातो पर जंग हुवा करती थी।<br>
तू रूठ कर भी कहाँ ,सच में रूठा करती थी।</p>
<p dir="ltr">फिर हाईट तेरी और कद मेरा बढ़ने लगा।<br>
में तो पास था ,पर दुरी का मतलब समझने लगा।</p>
<p dir="ltr">तेरी नादानियों को अपनी गलतियां समझने लगा।<br>
तू भूल ना जाये सचमुच कहि मुझे ,यही डर लगने लगा।</p>
<p dir="ltr">में यूँ ही नही रूठ जाता तेरी किसी बात पर।<br>
हवा भी पास से गुजरे तेरे तो गुस्सा आता है मुझे अपने आप पर।</p>
<p dir="ltr">पता है मुझे,एक दिन तू चली जायेगी।<br>
पर गम तो उस दिन होगा जब उसके साथ रहकर तू मुझे भुल जायेगी।</p>
<p dir="ltr">क्या तू अपने आप को श्याम के जैसा रख पायेगी?<br>
रही साथ रुक्मणी तो क्या राधा को भूल जायेगी?</p>
<p dir="ltr">क्या राधा को भूल जायेगी?<br>
क्या राधा को भूल जायेगी?<br></p>
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