मै अब भी उसे चाहता हु
<p dir="ltr">कविता का शिर्षक "है-उसे चाहता हूँ'</p>
<p dir="ltr">लेखक-राम लोहार</p>
<p dir="ltr">उसकी आँखे देखकर ही सबकुछ समझ जाता हु।<br>
वो मुझे नही चाहती पर में अब भी उसे चाहता हूँ।</p>
<p dir="ltr">सारे गमो को दिल में दबाकर उसके सामने मुस्कुराता हूँ।<br>
उसे नही पता पर छुप -छुप कर उसकी हर तकलीफ़ में साथ निभाता हूँ।</p>
<p dir="ltr">मुझे यकीन है,इतना तो उस पर वो भी मुझे चाहती होगी।<br>
शायद जमाने के डर से प्यार को छुपाती होगी।</p>
<p dir="ltr">वो भी,मेरी तकलीफों को छुप -छुप कर ही सुलजाति होगी।<br>
हर वक्त उसे भी मेरी याद आती होगी।</p>
<p dir="ltr">उसकी बेवफाई को वफ़ा समझकर बस में यही दोहराता हूँ।</p>
<p dir="ltr">कल वो ही नही, जमाना याद रखे मुझे कुछ ऐसा कर जाना चाहता हूँ।</p>
<p dir="ltr">में अब भी उसे चाहता हूँ।<br>
में अब भी उसे चाहता हूँ।</p>
<p dir="ltr">लेखक-राम लोहार</p>
<p dir="ltr">उसकी आँखे देखकर ही सबकुछ समझ जाता हु।<br>
वो मुझे नही चाहती पर में अब भी उसे चाहता हूँ।</p>
<p dir="ltr">सारे गमो को दिल में दबाकर उसके सामने मुस्कुराता हूँ।<br>
उसे नही पता पर छुप -छुप कर उसकी हर तकलीफ़ में साथ निभाता हूँ।</p>
<p dir="ltr">मुझे यकीन है,इतना तो उस पर वो भी मुझे चाहती होगी।<br>
शायद जमाने के डर से प्यार को छुपाती होगी।</p>
<p dir="ltr">वो भी,मेरी तकलीफों को छुप -छुप कर ही सुलजाति होगी।<br>
हर वक्त उसे भी मेरी याद आती होगी।</p>
<p dir="ltr">उसकी बेवफाई को वफ़ा समझकर बस में यही दोहराता हूँ।</p>
<p dir="ltr">कल वो ही नही, जमाना याद रखे मुझे कुछ ऐसा कर जाना चाहता हूँ।</p>
<p dir="ltr">में अब भी उसे चाहता हूँ।<br>
में अब भी उसे चाहता हूँ।</p>